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भागवत केवल ग्रंथ नहीं बल्कि हमारे जीवन का पथ-प्रदर्शक हैं, जो आत्मा की शांति और मोक्ष की ओर ले जाता हैं – पंडित विजय शंकर मेहता

कोसा , कांसा एवं कंचन की नगरी चांपा तथा हसदेव सरिता की पावन धरा पर श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन कलशयात्रा निकालकर किया गया । यह आयोजन फर्म चैम्पियन सिरामिक्स कंपनी लिमिटेड , चांपा के संचालक सजन अग्रवाल एवं उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति किरण अग्रवाल के आतिथ्य में सर्वपितृ मोक्षार्थ गया श्राद्धान्तर्गत किया जा रहा हैं । कथा का शुभारंभ सायंकाल 4 बजें से हुआ , जिसमें व्यासपीठ पर विराजित पंडित विजय शंकर मेहता जी ने प्रथम दिन अपने दिव्य और सारगर्भित व्याख्यान से उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को भाव-विभोर कर दिया

श्रीमद्भागवत कथा का महत्व

पं विजय शंकर मेहता ने श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ मात्र नहीं बल्कि जीवन का पथ-प्रदर्शक हैं जो आत्मा की शांति और मोक्ष की ओर ले जाता हैं । उन्होंने कहा कि जीवन में जितना अधिक सत्य होगा हम उतने ही परमात्मा के निकट होंगे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा तीन कारणों से की जाती हैं –

आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए

विश्वविख्यात कथावाचक पंडित विजयशंकर मेहता ने कहा कि श्रीमद्भागवत तीन कारणों से की जाती हैं , प्रथय पितृमोक्षार्थ , अपने बच्चों के भविष्य सुधारने और तीसरा वर्तमान को सुधारने के लिए । उन्होंने कहा कि भागवत कथा आत्मा को शांति और मोक्ष की ओर ले जाती हैं । जीवन में जितना अधिक सत्य होगा, हम उतने ही परमात्मा के निकट होंगे।

जीवन के चार व्यवहार

कथा हमारे जीवन के चार व्यवहार को नियंत्रित करती हैं और हमें अशांत नहीं वरन् शांत करती हैं। जीवन में पांच रास्तों से अशांति का सामना करना पड़ता हैं, जिनका शमन कथा के श्रवण से होता हैं -संसार, संपत्ति, संबंध, स्वास्थ्य और संतान।

श्रीमद्भागवत कथा के पूर्व की गतिविधियां

राधाकृष्ण मंदिर से कलशयात्रा निकाली गई – सुबह रिमझिम रिमझिम बारिश में 09 बजें के बीच सदर बाजार स्थित श्रीराधा-कृष्ण मंदिर से कथा आयोजक अग्रवाल परिवार द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई जो कि कथा स्थल सजन अग्रवाल निवास स्थल तक पहुंची ।

व्यासपीठ पर स्वागत-सत्कार- आयोजक अग्रवाल परिवार की ओर से सजन अग्रवाल, श्रीमती किरण अग्रवाल, प्रतीक अग्रवाल , प्रवीर अग्रवाल और निकेत अग्रवाल सपरिवार और स्वजनों के साथ व्यासपीठ पर विराजित पंडित विजय शंकर मेहता का आत्मीय स्वागत तिलक, चंदन लगाकर और पुष्प-हार पहनाकर किया गया।

कथा के दौरान की धार्मिक गतिविधियां।

आरती और आशीर्वाद- सायंकाल 07 बजें कथा विश्राम के बाद श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती की गई । इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने व्यासपीठ पर विराजित पंडित मेहता का चरण छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रद्वालुओं की उपस्थिति- इस अवसर पर पंडित भागीरथी दुबे, पं हरिशरणम दुबे, देवेन्द्र दुबे, सहित ओम प्रकाश जालान,नंद किशोर,शिव अग्रवाल,शीतल, दिनेश केडिया, सुनील बनकर, डॉ रविन्द्र द्विवेदी, डॉ श्रीमति कुमुदिनी द्विवेदी, सुनील बनकर, श्रीमति ज्योति बनकर, शशिभूषण सोनी, डॉ संतोष अग्रवाल, श्रीमति मीना देवांगन, डॉ सुरेद्र राठौर, शैलेष शर्मा, पूरुषोतम देवांगन,अजय बंसल, डॉ रमाकांत सोनी, डॉ राम खिलावन यादव संपादक जनादेश 24न्यूज , शांति कश्यप , शंकर अग्रवाल, किरण अग्रवाल,अनिल मनवानी, सुनील मनवानी, अर्जुन लाल सोनी,  और अन्य श्रद्धालु जन मौजूद थे ।

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