ज़िला

*श्रीकृष्ण जन्मोंत्सव तथा भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला की कथा में झूमते रहे श्रद्धालु भक्त*

*अच्छे कर्म से देवताओं को अमृत की प्राप्ति हुई थी – सुप्रसिद्ध कथा वाचिका पकंजा-प्रज्ञा दीदी ।*

*जिला पंचायत के सभापति राजकुमार साहू के निवास में आयोजित हो रहा श्रीमद्भागवत कथा*

*श्रीकृष्ण जन्मोंत्सव तथा भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला की कथा में झूमते रहे श्रद्धालु भक्त*

न्यूज़ जांजगीर-चांपा । जीवन में हमेशा मनुष्य को अच्छा कर्म करनी चाहिए ताकि हमें लक्ष्य की प्राप्ति हो सके । जैसे अच्छे कर्म से देवताओं में अमृत की प्राप्ति हुई थी , उक्ताशय के विचार भाजपा नेता तथा सभापति ज़िला पंचायत जांजगीर-चांपा के राजकुमार साहू के तहसील रोड स्थित चांपा निवास स्थल पर आयोजित सप्त-दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के दौरान व्यासपीठ पर विराजीत पंकजा दीदी और प्रज्ञा दीदी ने कही । कथा यात्रा के चतुर्थ दिन कथा का रसपान करने पूर्व नपाध्यक्ष चांपा राजेश कुमार अग्रवाल, साहित्यकार शशिभूषण सोनी, डॉ रविंद्र कुमार द्विवेदी,भाजपा नेता अमर सुल्तानिया पंडित रामगोपाल गौरहा, परमेश्वर स्वर्णकार , सुद्धेलाल साहु सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल रहे । कथा में मुख्य यजमान शिवकुमार साहू और उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति खिलेश्वरी साहू हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से रात्रि 8 आठ बजे तक प्रवाहित हो रही हैं ।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तथा भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीला की कथा सुनाते हुए सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंकजा दीदी ने कहा कि जब प्रभु का अवतार हुआ तब वे चार भुज लेकर अवतार हुए जैसें इस भूलोक में भगवान श्रीराम जी अवतार हुआ था । बाद में लीला करने के लिये भगवान बाल गोपाल बाल स्वरूप धारण किए ।
एक कथा में पंकजा दीदी ने कहा कि भगवान की सेवा करने के लिये मेवा की प्राप्ति होती हैं । उन्होंने आगे की कथा में बताया कि माता यशोदा को पता नही था कि भगवान बाल गोपाल का अवतार हुआ हैं । जब माता यशोदा चादर उठा कर देखी तो देखी बाल गोपाल उनके गोद में खेल रही थी । इधर नंद बाबा कमरे के बाहर 108 बार हरि हरि शरण जप रहे थे । जब उन्हें जानकारी हुए उनके यहां बाल गोपाल का जन्म हुआ तो नंद बाबा दौड़-दौड़े जाकर यमुना नदी में 108 बार डुबकी लगाकर, नए वस्त्र धारण करके लल्ला के दर्शन करने पहुंचे । खुशी में लोगो हीरा, मोती लुटा रहे थे । खुशी के मारे एक द्वार से सोना, चांदी, हीरा, तिल सहित गुप्त दान करे थे । इधर माता रोहणी बलदाऊ भईया को लेकर भगवान श्रीकृष्ण जी के पास ले गये। माता रोहाणी खुशी के मारे नाचते गाते बोली जुग-जुग जिए तेरो लाल । इधर मथुरा में जब महराज कंश को श्रीकृष्ण के जन्म की जानकारी पड़ी तब तत्काल अपने राज महल में भगवान श्रीकृष्ण को मारने का योजना बनायी गयी। तब पूतना आयी और महराज कंश से बोली इसकी जवाबदारी मुझे दिया जाए और पूतना भगवान बाल गोपाल के पास दूध पिलाने पहुंची और पुतना काल के गाल में समा गयी। इसी तरह बाल गोपाल श्रीकृष्ण पुतना का वध कर उसका उद्धार किया । वही 22 नवम्बर शुक्रवार को मथुरा गमन, कंस उद्धार, रूक्मणी विवाह, 23 नवम्बर को शनिवार को सुदामा चरित्र, परिक्षित मोक्ष की कथा सुनायी जायेगी ।

*तुलसी वर्षा, गीता पाठ, सहस्त्रधारा तथा भोग भंडारा के साथ रविवार को समापन होगा।*

इसके अलावा कथा विश्राम चढ़ोत्री एवं 24 नवम्बर रविवार को तुलसी वर्षा , गीता पाठ, सहस्त्रधारा, ब्राम्हण भोज, यथा योग्य भंडारा का आयोजन के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन होगा । यजमान के रूप में शिवकुमार साहू व श्रीमती खिलेश्वरी साहू बैठे हुए हैं । आज श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य श्रवण करने वालों में मुख्यतः जनपद सदस्य राजेश कुमार कश्यप, चांपा के पूर्व पार्षद श्रीमती अंजूलता राठौर, श्रीमति शशिप्रभा सोनी, इंग्लिश सिंह, हरीश कुमार राठौर, महेश राठौर, बंशीलाल साहू, श्रीमती वीना साहू, लक्ष्मण साहू , जगमोहन साहू, गिरधर साहू, रामाधार साहू, मिठाई लाल साहू, पुनी राम साहू, शांतिलाल साहू, बंशीलाल साहू, जीवनलाल साहू , पंडित रामगोपाल गौरहा सहित बड़ी संख्या में लोग कथा सुन रहे थे ।

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