Uncategorized

निराला साहित्य मंडल चांपा द्वारा हिंदी दिवस समारोह आयोजित

निराला साहित्य मंडल चांपा द्वारा हिंदी दिवस समारोह आयोजित

हिंदी हमारी आत्मा की भाषा एवं अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम- डॉ. घनश्याम दुबे

छत्तीसगढ़ी भाखा में श्रीमद्भगवद्गीता के अनुवादक रविन्द्र सोनी ‘भारत’ का आत्मीय अभिनंदन

निराला साहित्य मंडल चांपा के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर कैलाश सा मिल सभागार में विशेष साहित्यिक एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल के अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. घनश्याम दुबे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में पं. दिनेश दुबे एवं छत्तीसगढ़ी भाखा में श्रीमद्भगवद्गीता का अनुवाद करने वाले साहित्यकार श्री रविन्द्र सोनी ‘भारत’ उपस्थित थे।

कार्यक्रम में मंडल के मुख्य संरक्षक पं. हरिहर प्रसाद तिवारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पं. घनश्याम शर्मा, पं. रामकिशोर शुक्ला, कोषाध्यक्ष पं. रामगोपाल गौराहा सहित साहित्यकार, शिक्षक एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं महाप्राण निराला के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। मंडल के सचिव डॉ. रविन्द्र द्विवेदी ने उपस्थित अतिथियों एवं साहित्यप्रेमियों के साथ समवेत स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। तत्पश्चात मंचस्थ अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अक्षत-चंदन से स्वागत किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. घनश्याम दुबे ने कहा कि हिंदी हमारी अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ एवं सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि निराला साहित्य मंडल का उद्देश्य हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ना है। हिंदी दिवस हमें अपनी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसके व्यापक उपयोग के प्रति अपने दायित्व का स्मरण कराता है। उन्होंने अपने दक्षिण भारत प्रवास के अनुभव साझा करते हुए हिंदी बोलने और समझने में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया तथा कहा कि इससे हिंदी भाषा की उपयोगिता और उसके व्यापक महत्व का सहज अनुभव होता है।

इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता का छत्तीसगढ़ी भाखा में अनुवाद करने वाले साहित्यकार रविन्द्र सोनी ‘भारत’ का निराला साहित्य मंडल चांपा द्वारा आत्मीय अभिनंदन किया गया। सम्मान से अभिभूत श्री सोनी ‘भारत’ ने मंडल के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी लोकभाषा में श्रीमद्भगवद्गीता के भावों को जन-जन तक पहुँचाना उनके लिए साहित्यिक दायित्व के साथ आत्मिक संतोष का विषय है। उन्होंने हिंदी तथा छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन से ही हमारी सांस्कृतिक विरासत और लोकचेतना सशक्त होगी। उन्होंने निराला साहित्य मंडल द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर किए गए सम्मान के लिए सभी पदाधिकारियों एवं साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

मंडल के मुख्य संरक्षक एवं प्रमुख प्रवक्ता पं. हरिहर प्रसाद तिवारी ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि हिंदी को मजबूत बनाने के लिए उसे दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। बैंक, कार्यालय सहित सभी सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत कार्यों में हिंदी के प्रयोग तथा हिंदी में हस्ताक्षर करने की आदत विकसित कर भाषा के प्रति सम्मान प्रकट किया जाना चाहिए। उन्होंने हरिऔध के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से एक ही शब्द के अनेक अर्थों को स्पष्ट करते हुए हिंदी भाषा की व्यापकता, गहराई और अभिव्यक्ति क्षमता को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थितजनों ने खूब सराहा।

अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। यह भारत सहित विश्व के अनेक देशों में बोली और समझी जाती है। हिंदी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास करते हुए इसे बोलचाल एवं लेखन में अधिकाधिक अपनाने की आवश्यकता है।

भागवत भूषण पं. दिनेश दुबे ने कहा कि हिंदी हमारी अस्मिता और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। इस भाषा ने भारतीय समाज को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बाँधने का कार्य किया है। हिंदी को केवल पुस्तकों और मंचों तक सीमित न रखकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपयोग में लाना तथा अगली पीढ़ी तक आत्मविश्वास के साथ पहुँचाना हम सभी का दायित्व है।

मंडल के प्रवक्ता नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि हिंदी हमारी अमूल्य धरोहर है और इसका संरक्षण हमारा सामूहिक दायित्व है। वैश्वीकरण के दौर में भी हिंदी की महत्ता कायम रहे, इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा।

इस अवसर पर बिलासपुर से पधारीं श्रीमती चेष्टा शुक्ला एवं वरिष्ठ साहित्यकार पं. रामगोपाल गौराहा ने हिंदी की महिमा पर सुंदर काव्य-पाठ प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने सराहा।

मंडल के सचिव एवं कार्यक्रम संचालक डॉ. रविन्द्र द्विवेदी ने कहा कि हिंदी हमारी आत्मा की भाषा है, जो हमें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ती है। यदि हम अपनी संतानों को हिंदी बोलने, पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित करेंगे, तभी हिंदी का भविष्य और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अथवा अन्य भाषाओं से हमारा कोई विरोध नहीं है, लेकिन हिंदी को भूलना अपनी सांस्कृतिक जड़ों और अस्तित्व से दूर होना है। हिंदी दिवस अपनी मातृभाषा की गरिमा एवं गौरव की रक्षा करने का संकल्प लेने का अवसर है।

कार्यक्रम में श्रीमती कमला तिवारी, अंजू द्विवेदी, श्रीमती मंजू दुबे, शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ. भुवनेश्वर देवांगन, लक्ष्मीनारायण तिवारी, प्रदीप श्रीवास सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रविन्द्र द्विवेदी ने किया। अंत में मंडल के अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, सम्मानित साहित्यकार, साहित्यप्रेमियों एवं सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के पश्चात सभी ने स्वल्पाहार का आनंद लिया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *