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प्रमोद कुमार यादव के निवास स्थल पर चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के पंचम दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मणी मंगल विवाह धूमधाम से मनाई गई इस दौरान सुंदर सजी हुई झांकी ने सबका मन मोहा

न्यूज़ जांजगीर-चांपा ! प्रमोद कुमार यादव के निवास स्थल पर चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के पंचम दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मणी मंगल विवाह धूमधाम से मनाई गई इस दौरान सुंदर सजी हुई झांकी ने सबका मन मोहा । विवाह संस्कार और मंगल गीतों के साथ बारात निकाली गई , जिसमें प्रमोद कुमार यादव परिवार के साथ-साथ श्रद्धालु-भक्त बाराती और घराती बनें । इस दौरान भक्ति रुपी गंगा में गोता लगाकर श्रोताओं ने श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के विभिन्न अलौकिक रहस्यों को जाना । श्रीश्याम भवन पुछेली में बुधराम यादव बड़े गुरुजी के वार्षिक श्राद्ध निमित्त सप्त-दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण सखा उद्धव प्रसंग के बाद रुक्मणी-श्रीकृष्ण मंगल विवाह की सुंदर झांकियां सजाई गई । अंचल के सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंड़ित वीरेंद्र कुमार पाण्डेय जी महराज ने भक्ति रुपी गंगा में श्रोतागण गोता लगाकर पुण्य स्नान कर रहे हैं और प्रस्तुत भजन-कीर्तन में अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं ।
इस दौरान आचार्य पंडित वीरेंद्र कुमार पाण्डेय जी ने जैसे ही “बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन हैं गयो लटा-लटा ” बहुत ही सुंदर भक्तिपूर्वक गाना गाकर प्रस्तुत किया श्रद्धालु-भक्त झूम उठे । कथा स्थल श्याम भवन पुछेली पूरी तरह से द्वारिका पुरी धाम में परिवर्तित हो गया बन गया । स्थल पर रुक्मणी देवी और भगवान श्रीकृष्ण चंद्र जी के वेशभूषा में श्रीमति शारदा देवी सुरेंद्र कुमार यादव के छोटी बहू सुंदर छवि में दिखाई दे रही हैं। इस दौरान कथा स्थल पर
भगवान और भक्त का आत्मा से परमात्मा का तारतम्य जुड़ गया । इस अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य श्रवण करने साहित्यकार शशिभूषण सोनी और उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति शशिप्रभा सोनी तथा सुपुत्र आलोक कुमार सोनी पहुंचे और उन्होंने मातुश्री श्रीमति गंगा बाई यादव तथा दुलौरिन बाई यादव के साथ मिलकर कथा का रसपान किया और कथा यात्रा के सफ़र को यादगार बनाया ।

भागवताचार्य पंड़ित वीरेंद्र पाण्डेयजी ने कहा कि रुक्मिणी भगवान की माया के समान थी, रुक्मणी ने मन ही मन यह निश्चित कर लिया था कि भगवान श्रीकृष्ण ही मेरे लिए योग्य पति हैं लेकिन रुक्मिणी का भाई रूक्मी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था इससे उसने उस विवाह को रोक कर , शिशुपाल को रुक्मिणी का पति बनाने का निश्चय किया , इससे रुक्मिणी को बहुत दुःख हुआ। कथा यात्रा का विस्तार करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अपने एक विश्वासपात्र को भगवान श्रीकृष्ण के पास भेजा साथ ही अपने आने का प्रयोजन बताया। इसके बाद श्रीकृष्ण जी विदर्भ जा पहुंचें । उधर रुक्मिणी का शिशुपाल के साथ विवाह की तैयारियां हो रही थी । परंतु उनकी प्रार्थना का असर हुआ और श्रीकृष्ण का विवाह रुक्मिणी के साथ हुआ ।इस अवसर पर कथा सुनने आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी की झांकी के दर्शन किए । कथा में सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही हैं । लोकेश कुमार यादव ने कथा रसपान करने लोगों को आमंत्रित किया हैं ।

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