बहेराडीह में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महापुराण का आयोजन ! भक्ति की गंगा प्रवाहित हो रही हैं
*तीनों लोकों के कल्याण के लिए राजा भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाए जिससे सबको मुक्तिt मिले । गंगा अवतरण की कथा हमें मां गंगा मैय्या की करुणा और दया के गुणों से परिचित कराती हैं – पंडित श्रीउत्तम मिश्रा जी सिरली वाले



गंगा की उत्पत्ति की कथा सगर के 60हजार पुत्रों को मां गंगा की कृपा से सद्गति को प्राप्त हुई भागीरथ के विशेष मेहनत और भक्ति भाव से कृपा भोले नाथ के होने सगर के 60हजार पुत्र को मुक्ति मिली थी इन्हीं के कुल में भागीरथी का जन्म हुआ और भागीरथी के द्वारा ही इन सभी पूर्वजों का उद्धार हुआ
महराज दिलीप के पुत्र भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा मैय्या को धरती पर लाने अत्यंत कठोर तपस्या किया तब ब्रह्माजी उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान देने प्रकट हुए । भागीरथ को वर मांगने के लिए कहा तब भागीरथ ने गंगा को धरती पर लाने की बात कही , जिससे वह अपने साठ हजार पूर्वजों को मुक्त कर सके । इस पर चिंतन करते हुए ब्रम्हा जी ने कहा कि गंगा को तुम्हारे साथ तो भेजता हूं लेकिन उसकी तीव्र गति को कौन सहन करेगा अंत: इसके लिए तुम्हें भगवान शिव की शरण लेनी चाहिए ,वही तुम्हारी मदद करेंगे। गंगा को पृथ्वी पर लाने भागीरथ ने अपनी तपस्या से शिवजी को संतुष्ट किया और गंगा के तेज़ प्रवाह को अपनी जटाओं में रोकने के लिए तैयार हो जाते हैं। गंगा को अपनी जटाओं में रोककर एक जटा को धरती पर छोड़ देते हैं । गंगा जी भागीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम में गई तब गंगा के जल से अपने पूर्वजों की मुक्ति दिलाने में सफ़ल होते हैं । उक्त उद्गार संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन गंगा अवतरण की महिमा का वर्णन करते हुए व्यासपीठ पर विराजमान परम-पूज्य पंडित पंडित श्री उत्तम मिश्रा जी सिरली वाले ने कही भगवान परशुराम जी21बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन कर ब्राह्मणों की रक्षा की थी और उन्होंने आगे कथा में वहां उपस्थित माताओं बहनों को समझाते हुए कहा कि हम सभी को अपने पुत्री को संस्कारवान बनाना चाहिए और अच्छी शिक्षा प्रदान करना चाहिए उन्होंने यह समझाए कि अपने सास को मां एवं पति को परमेश्वर एवं उनके परिवार को अपने खुद का परिवार समझना चाहिए जिससे आपके घर स्वर्ग बन सके आपके व्यवहार से ही आपके घर स्वर्ग और नर्क बनता है इस लिए अच्छी सोच और नेक विचार होना चाहिए
श्रीमद्भागवत भागवत कथा का आयोजन 8अक्टूबर से 16अक्टूबर की नियत तिथि तक अविरल भक्ति भाव के प्रवाहित होते रहेगी
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन दोपहर 3 बजें से हरि इच्छा तक किया जा रहा हैं । इसमें मुख्य यजमान नन्दलाल यादव एवं उनकी धर्म पत्नी लक्ष्मीन यादव एवं उनके सुपुत्री मोनिका यादव जी के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है


व्यासपीठ से भागवताचार्य श्री उत्तम मिश्रा जी ने कहा कि मानव के साथ मानव बनना सरल हैं कपिल मुनि ने घोड़ा चुराया जिससे साठ हजार पुत्रों का उद्धार हुआ। गंगा अवतरण की कथा हमें गंगा मैय्या की करुणा और दया के गुणों से परिचित कराती हैं । गंगा ज्ञान का स्वरुप हैं इसलिए भागीरथ हो गया । गंगा विश्व पावनी और लोक माता हैं । गंगा मैय्या के आश्रय से मनुष्य भौतिक उन्नति नहीं बल्कि मानवता को उपकृत करने आध्यात्मिक उन्नति भी कर सकता हैं व्यासपीठ पर विराजीत आचार्य श्रीउत्तम मिश्रा जी को पुष्प गुच्छ और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया और आचार्य श्री ने उन्हें राधे-राधे दुपट्टा पहनाकर डॉक्टर रामखिलावन यादव संपादक जनादेश 24न्यूज एवं सुरेश यादव संपादक एक्सप्रेस न्यूज के संपादक एवं अजय अग्रवाल चांपा डॉक्टर संतोष यादव ,अर्जुन राठौर सरजू यादव एवं उनके धर्मपत्नी उमेदा यादव शिक्षक समारू यादव कोसमंदा आदि भागवत प्रेमियों ने भागवताचार्य श्री उत्तम मिश्रा जी का हार्दिक वंदन अभिनंदन एवं स्वागत किया।अंत में श्रीमद्भागवत पुराण कथा महात्म्य श्रवण के दौरान सभी लोगों ने मधुर दिव्य आरती का आनंद लिया यह एक अद्भुत अनुभव हैं , जहां भक्तिमय माहौल में भगवान की आरती सुनने से आत्मा को शांति और आनंद प्राप्त होता हैं ।’ मन में बसा कर तेरी मूर्ति उतारूं मैं गिरधर यह आरती भगवान कृष्ण की भक्ति और प्रेम को व्यक्त करती हैं । यह आरती सुनने से श्रद्धालु भक्तों को भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना जागृत होती हैं । श्रीमद्भागवत कथा महापुराण का आयोजन एक यादगार और धार्मिक पल हैं, जहां सत्संग,भजन-कीर्तन, विभिन्न पौराणिक ग्रंथों की कथा भगवान की आरती का आनंद लेते हैं और अपने मन में आत्मा को शांति और आनंद प्राप्त करते हैं
श्रीमद्भागवत हमे भक्ति सिखाती है तो वहीं रामचरित मानस हमें जीवन जीने की कला सिखाती है एवं रहा दिखाती है भागवताचार्य ने अपने मुखारबृंद से भागवत श्रोताओं को कहा की मनुष्य अपने चरित्र को सुधार ले तो राम बनने में कोई देरी नहीं है अर्थात अपने चरित्र को राम के चरित्र का अनुसरण करना चाहिए श्रीराम मर्यादा पुरूषोतम है और श्री कृष्ण जी जी लीला पुरूषोतम है
रामचरित्र की कथा भगवान शिव ने माता पार्वती जी को सुनाई थी और दूसरी में श्री राम जी की कथा को श्री राम को ही लव कुश उनके पुत्र ने सुनाई थी और अब हम सभी अविरल सुन रहे है जो पुरुष यदु वंश की कथा का श्रवण करेगा उनका समस्त पापों का सर्वथा नाश होगा अधर्मी और पापी का नाश करने के लिए ही भगवान श्री कृष्णा जी का अवतरित हुए है भगवान जन्म नहीं लिए बल्कि अवतरित हुए है गर्भ स्तुति से ही ज्योति के रूप में अवतरित हुए और सारागार प्रकाशवान ही गए थे और वासुदेव जी बंधन मुक्त हो गए थे