
“मौत का फाटक”, ग्रामीण हर दिन मौत से खेलने को है मजबूर!, एक पल की चूक जिंदगी खत्म… आखिर कब टूटेगी रेलवे के अधिकारियों की कुम्भकर्णी नींद..
“मौत का फाटक”, ग्रामीण हर दिन मौत से खेलने को है मजबूर!, एक पल की चूक जिंदगी खत्म… आखिर कब टूटेगी रेलवे के अधिकारियों की कुम्भकर्णी नींद..
जांजगीर-चाम्पा जिले के बलौदा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसमंदा में “मौत का फाटक है”, कई बार शिकायत, पर कोई सुनवाई नहीं!, फाटक पार कर ग्रामीण हर दिन मौत से खेलने को है मजबूर “एक पल की चूक से जिंदगी खत्म हो सकती है”. ऐसा हम नहीं यहां के लोगों और तस्वीरों का कहना है.
रेलवे फाटक बनाने का मुख्य उद्देश्य रेल पटरियों को पार करने वाले वाहनों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है. लेकिन जांजगीर-चाम्पा के कोसमन्दा गांव में बने इन 2 रेलवे फाटक का उद्देश्य उल्टा है, यहां मालगाड़ी, एक्सप्रेस, पैसेंजर ट्रेन रुक जाती है, जिससे फाटक दिनों-दिन लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनते जा रहा है, क्यों कि इस रेलवे फाटक की वजह से कई जिंदगी छीन गई है. इस फाटक से गुजरने से पहले हजार बार भी सोचना पड़े तो ये भी कम ही होगा. क्यों कि फाटक से गुजरने वाला व्यक्ति कभी अपने मंजिल तक वक्त पर नहीं पहुंचता. सबसे बड़ी बात फाटक की वजह से गभर्वती महिलाएं, मरीज को वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंचा जा सकता और उनकी मौत हो जाती है. ऐसे में फाटक किसी जान लेवा रेलवे फाटक से कम नही है. छात्र-छात्रा या अन्य लोग जान जोखिम में डालकर ट्रेन डिब्बों के नीचे या बफर से पार होते हैं. जिससे कई बार ट्रेन आगे बढ़ जाती है, इससे कभी भी बड़ी घटना घटित हो सकती है. तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कि कैसे लोग बफर से ट्रेन पार कर रहें हैं, ऐसे में एक पल की चूक से जिंदगी खत्म हो सकती है और ग्रामीणों पर मौत का खतरा मंडराता रहता है. अभी हाल में ही कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है और समस्या के निराकरण करने की गुहार लगाई है. ग्रामीणों ने कहा है कि या तो सिग्नल को फाटक से दूर किया जाए, या ट्रेन को फाटकों से पहले रोका जाए, ताकि उन्हें समस्या ना हो. ग्रामीणों ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में मांग की है, रेल्वे फाटक के पहले सिग्नल पर ही ट्रेनों को खड़ा कराने रेल्वे विभाग को अवगत कराएं, अंडरब्रिज निर्माण कार्य को शीघ्र एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराया जाए, निर्माण कार्य में हो रही देरी की उच्च स्तरीय जांच कर संबंधित अधिकारी / ठेकेदार के विरूद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए.
गांव के दोनों रेलवे फाटक पर रुक जाती है ट्रेन
वैसे तो आपने ट्रेन को आउटर में रुकते देखा होगा, लेकिन कोसमन्दा गांव के इन 2 फाटक पर सिग्नल नहीं मिलने से फाटक के बीच में ट्रेनें रुक जाती है, जिससे घंटो फाटक पार नहीं किया जा सकता. छात्र-छात्रा और व्यक्ति जान जोखिम में डालकर ट्रेन डिब्बों के नीचे या बफर से फाटक पार करने मजबूर हैं. जिससे हादसे का खतरा बना रहता है और इसी बात से समस्याओं का अंदाजा लगाया जा सकता है कि समस्या विक्राल है. ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत भी की है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला. रेलवे के अधिकारियों को फुरसत नहीं कि समस्या पर ध्यान दें, ऐसे में ग्रामीण और फाटक से गुजरने वाले लोग जान जोखिम में डालने मजबूर हैं. रेलवे का नियम है कि फाटक पर ट्रेन नहीं रुकनी चाहिए, लेकिन यहां नियम ताक पर रखे हैं और रेलवे की मनमानी जारी है.
अंडरब्रिज का काम कछुए की गति
कोसमन्दा समपार के लिए अंडरब्रिज का निर्माण 2 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन 2 साल बाद भी अंडरब्रिज का काम अधूरा ही है, अंडरब्रिज का काम कछुए की गति से चल रहा है, जिससे ग्रामीण दुःखी है और धीरे-धीरे उनमें आक्रोश झलक रहा है. अंदर ब्रिज के शुरू होने से उन्हें समस्या से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कहाँ होगा साहब रेलवे ने तो काम ही रोक दिया है, ना जाने अब रेलवे के अधिकारी जागेंगे और ब्रिज बनवाएंगे.
जिला प्रशासन का जवाब
जब हम जिला प्रशासन तक इस समस्या को लेकर पहुंचे तो अधिकारी ने कहा कि रेलवे के अधिकारियों को पत्राचार किया गया है, समस्या का निराकरण निकालने पहले किया जाएगा, लेकिन काम तो रेलवे को ही करना है. अंडरब्रिज के लिए रेलवे की टीम आकर निरीक्षण करेगी, जिसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी.



