चांदी की पालकी में निकलेगी कलेश्वर नाथ बाबा की बारात, रंगपंचमी पर 200 सालों से निभाई जा रही परंपरा


जांजगीर चांपा: शिव जी की बारात कैसे होती है, ये सवाल हर किसी के जहन मे होता है, अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तिथियों पर शिव बारात की परंपरा है. जांजगीर चाम्पा जिला के पीथमपुर में भी होली के पांचवें दिन कलेश्वर नाथ बाबा की शिव बारात निकाले की परंपरा है. जिसके लिए मंदिर के अंदर से चांदी की पालकी में पंचमुखी शिव जी को बैठा कर नगर भ्रमण कराया जाता है.




आयोजन में वैष्णव और नागा साधु एक साथ बराती बन कर बैंड, ताशा और डीजे की धुन पर थिरकते हुए निकलते हैं. बाबा की बारात को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और कलेश्वर नाथ बाबा के साथ पंचमी का पर्व धूम धाम के साथ मानते हैं.

200 सालों से चली आ रही शिव बारात की अदभुत परंपरा
जांजगीर चाम्पा जिला मुख्यालय से 9 किलोमीटर की दूरी पर हसदेव नदी के किनारे पीथमपुर गांव में स्वयं भू शिव लिंग स्थापित है. जिसे क्षेत्र के लोग कलेश्वर नाथ बाबा के नाम से जानते हैं. कलेश्वरनाथ बाबा के दरबार में हर दिन श्रद्धालु आस्था के साथ आते है और शिव जी को बेल पत्र, कनेर फूल धतूरा के फल अर्पित कर पूजा पाठ करते हैं. सावन में महिने भर श्रद्धालुओं की भारी भीड उमड़ पड़ती है.

शिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा होती है. मान्यता है कि यहां जो भी भक्त भोलेनेनाथ से इच्छा करता है उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है.


200 सालों से निभाई जा रही परंपरा
शाही स्नान के बाद गंगा आरती का होगा आयोजन

होली के पांचवें दिन रंगपंचमी मनाने की परंपरा है. अलग-अलग क्षेत्र मे अलग अलग तरीके से इस दिन को मनाया जाता है, रंग पंचमी मे पीथमपुर के मंदिर से भगवान कलेश्वर नाथ की पालकी निकाली जाती है. चांदी की पालकी में पंचमुखी शिव जी को विराजमान किए जाता है और श्रद्धालु पालकी को उठाकर मेला परिसर में घुमाते हैं.

आयोजन के दौरान भक्त पालकी के सामने बाराती के रूप नाचते-गाते निकलते हैं. बारात में नागा साधुओं की टोली भी निकलती है. 200 सालों से होने वाले आयोजन में नागा साधु हर साल आकर्षण का केंद्र रहते हैं.



वैष्णव संप्रदाय के साधु भी आयोजन में शिरकत करते हैं. बारात में शामिल भक्त रंग और गुलाल भी खलते हैं.

200 सालों से निभाई जा रही परंपरा 15 दिवसीय मेले का होगा आगाज

पीथमपुर में रंगपंचमी के दिन से 15 दिवसीय मेले कीभी शुरुआत होती है. कल रविवार शाम 4 बजे से कलेश्वरनाथ बाबा की पंचमुखी प्रतिमा चांदी की पालकी में सवार होकर मेले में भ्रमण करेगी और नागा साधु हसदेव नदी में शाही स्नान करेंगे. वहीं वैष्णव साधु गंगा आरती की तर्ज पर हसदेव आरती करेंगे.