भारतीय संस्कृति सनातन (अमर) मानी जाती है, जो समय के साथ विकसित होकर आधुनिकता के साथ तालमेल बिठाते हुए भी अपने मूल मूल्यों को सुरक्षित रखती है भागवताचार्य पण्डित जी प्रेमनारायण शर्मा


भारतीय संस्कृति सनातन (अमर) मानी जाती है, जो समय के साथ विकसित होकर आधुनिकता के साथ तालमेल बिठाते हुए भी अपने मूल मूल्यों को सुरक्षित रखती है भारत की संस्कृति है कि अपने माता पिता गुरु के प्रति आदर एवं आदेश का पालन करना और अपने पिता का चयन किया गया पति को पुत्री स्वीकार करते है पति का चयन पिता करता है लेकिन अब देख जा रहा है कि संस्कृति में कुछ बदलाव आ रहा है और पुत्र पुत्री भी जीवन साथी चयन करना शुरू कर रहे है याने ज्यादातर मनपसंद विवाह को ज्यादा जोर दे रहे है

विदेशी संस्कृति को स्वीकार कर रहे है और विदेशी संस्कृति को अपना रहे है विदेश में मुर्दा को दफनाया जाता लिकिन हम भारतीयों में अग्नि संस्कार कर जलाया जाता है पतिव्रता नारियों के ऊपर प्रकाश डाला गया और एक पति का चयन जीवनयापन करते है विशेष ध्यान आकर्षित किया गया और प्रतिव्रता को समझाया गया सुबाहु राजा के विवाह के समय का प्रकाश डाला गया युद्ध में दिव्य अस्त्रों का प्रयोग सुबाहु के पुत्र का नाम युद्धजीत और नाती के नाम शत्रुजीत है परम्बा ने दोनों दुष्टों का संहार किया
सुदर्शन ने मां अम्बा का उपासक थे मां ने आराधना से प्रसन्न हुए बड़ी सुंदर भजन की प्रस्तुति में भक्त जन झूम कर भक्ति में नाच उठे सुंदर भजन बिगड़ी हुई बना दे अंबे ओ मेरी मैया बात बिगड़ी मेरी बना दे शेरा वाली मैया
ब्रह्मा विष्णु शिवाय शिव आराधना मां भगवती की सभी करते है किसी पूजा आराधना करने पहले उसकी पूजन विधि विधान जानना चाहिए
साल में 4नवरात्रि होती है इसकी जानकारी साझा किया दो को गुप्त नवरात्रि बताया है और दो को प्रत्यक्ष नवरात्रि बताया है और प्रत्यक्ष नवरात्रि का विशेष महत्व बताया है मां दुर्गा जी की सप्तशती का पाठ करने से भागवत कथा करने का पूरा फल मिलता है नव रात्रि में अवश्य पाठ करना चाहिए
दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व में बताया कि एक बिल्ली मर गई थी लेकिन पंडित जी ने दुर्गा सप्तशती पाठ करके स्तुति करके बिल्ली के ऊपर जल छिड़के तो बिल्ली जीवित होकर चलते बने इस तरह इस सप्तशती के महत्व को समझाया
10साल तक हो लड़की गौरी होती अलग उम्र में पूर्ति की अलग अलग रूप होती है इसकी रूप की जानकारी साझा किया 10वर्ष से नीचे की कन्या का पूजा करना चाहिए नहीं तो दोष लगता है
रामायण के अनुसार, सुबाहु राक्षसी ताड़का का पुत्र और मारीच का भाई था। वह और उसका भाई मिलकर ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में मांस और रक्त की वर्षा कर उसे अपवित्र करते थे। महर्षि विश्वामित्र के अनुरोध पर, श्री राम ने दिव्य अस्त्र का उपयोग करके सुबाहु का वध किया और यज्ञ की रक्षा की, जबकि मारीच भाग गया


सुबाहु, सुंडा और ताड़का का पुत्र था। वह अपने भाई मारीच के साथ मिलकर जंगल के ऋषियों, विशेषकर विश्वामित्र के यज्ञों को बाधित करता था जब ऋषि विश्वामित्र ने अयोध्या के राजा दशरथ से सुरक्षा मांगी, तो राम और लक्ष्मण ने यज्ञ की रक्षा का दायित्व संभाला। युद्ध के दौरान, राम ने सुबाहु को मार डाला, जबकि मारीच लंका भाग गया।
भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और विविधतापूर्ण संस्कृतियों में से एक है, जो हज़ारों वर्षों की परंपरा, धर्म, दर्शन, कला और जीवन मूल्यों (जैसे ‘वसुधैव कुटुंबकम्’) पर टिकी है। “विविधता में एकता” इसका मूलमंत्र है, जहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं (जैसे हिंदी, संस्कृत, तमिल), पहनावे और व्यंजनों का संगम देखने को मिलता है। यह मेहमाननवाज़ी, संयुक्त परिवार, योग, आयुर्वेद और बुजुर्गों के सम्मान (चरण स्पर्श) के लिए जानी जाती है।
नवरात्रि में 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है, जिन्हें अलग-अलग उम्र के अनुसार विशेष उपाधियाँ दी जाती हैं। 2 साल की कन्या को कुमारी, 3 साल की त्रिमूर्ति, 4 साल की कल्याणी, 5 साल की रोहिणी, 6 साल की कालिका, 7 साल की चंडिका, 8 साल की शांभवी, 9 साल की दुर्गा और 10 साल की कन्या को सुभद्रा कहा जाता है।
उम्र के अनुसार कन्याओं की उपाधि (देवी के रूप):
2 वर्ष (कुमारी): घर में सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए Herzindagi के अनुसार पूजा की जाती है।
3 वर्ष (त्रिमूर्ति): धन-धान्य और धर्म की वृद्धि के लिए पूजा की जाती है।
4 वर्ष (कल्याणी): परिवार के कल्याण और सफलता के लिए पूजा की जाती है।
5 वर्ष (रोहिणी): स्वास्थ्य लाभ और रोगों के नाश के लिए पूजा की जाती है।
6 वर्ष (कालिका): विद्या, विजय और शत्रुओं के नाश के लिए पूजा की जाती है।
7 वर्ष (चंडिका): ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए पूजा की जाती है।
8 वर्ष (शांभवी): वाद-विवाद में विजय और दुखों के नाश के लिए पूजा की जाती है।
9 वर्ष (दुर्गा): शत्रुओं के विनाश और कठिन कार्यों की सिद्धि के लिए पूजा की जाती है।
10 वर्ष (सुभद्रा): सभी मनोकामनाओं की पूर्ति और मोक्ष के लिए पूजा की जाती है।