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कंबल में लिपटा मिला नवजात, निर्दयी मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को रेलवे स्टेशन के फूट ओवरब्रिज में छोड़ा

कंबल में लिपटा मिला नवजात, निर्दयी मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को रेलवे स्टेशन के फूट ओवरब्रिज में छोड़ा

मेरा कसूर क्या था मां। मुझे क्यों अपने से जुदा कर दिया। यदि यूं ही लावारिस छोड़ना ही था तो मुझे दुनिया में क्यों लाए। कुछ इस तरह का सवाल नवजात अपनी मां से पूछ रही है, जिसे पैदा होने के बाद लावारिस स्टेशन में छोड़ दिया गया।

रेलवे स्टेशन चांपा के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर आज सुबह जो दृश्य सामने आया, उसे देखकर हर किसी का दिल बेचैन हो उठा। व्यस्त ट्रेनों की आवाज़ों, यात्रियों की भीड़ और प्लेटफॉर्म की हलचल के बीच एक कंबल में लिपटा छोटा-सा जीवन चुपचाप पड़ा था—जिसे देखकर किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि कोई मां अपने नवजात को इस तरह दुनिया के हवाले कर सकती है।

फूटओवरब्रिज के निर्माण स्थल के पास जब रेलवे पुलिस की नज़र उस कंबल पर पड़ी, तो वे पहले तो किसी सामान का अंदाज़ा लगा बैठे। लेकिन जैसे ही कंबल को हटाया गया, भीतर मासूम-सा नवजात बच्चा दिखाई दिया। ठंडी हवा में थरथराते उस बच्चे की धीमी-सी सिसकी ने सबको भीतर तक हिला दिया। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि जीवन की शुरुआत पर ही उसे इतना दर्द सहना पड़ेगा।

सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची। बच्चे को देखते ही उनके चेहरे पर भी हैरानी और भावुकता साफ झलक रही थी। एक पुलिसकर्मी ने बिना देर किए बच्चे को अपनी बाहों में उठाया और जिला अस्पताल ले जाया गया।

घटना के बाद प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। कुछ की आंखें नम थीं, कुछ अपने ही विचारों में खो गए—आखिर किस मजबूरी ने एक मां को इतना क्रूर बना दिया? कोई गरीबी की बात कर रहा था, तो कोई समाज के डर का जिक्र कर रहा था। लेकिन सच्चाई जो भी हो, दोषी सिर्फ परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि वह दिल भी है जिसने इस मासूम को अकेला छोड़ दिया।

इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। लोग दुआ कर रहे हैं कि यह बच्चा सुरक्षित रहे और उसे ऐसा परिवार मिले, जो उसे प्यार और अपनापन दे सके। शायद यह बच्चा किसी की दया नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की तलाश में अभी भी उम्मीद का दामन थामे बैठा है।

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