श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य का अंतिम दिन सुदामा चरित्र, गुरु महिमा, परीक्षित मोक्ष के साथ सप्त-दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन ।

बहेराडीह के दुर्गा चौक में नंदलाल यादव के घर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा ब्यास पीठाधीश्वर परम श्रद्धेय पंडित उत्तम मिश्रा जी सिरली वाले भागवताचार्य जी ने अपनी अमृतमयी ओजस्वी वाणी से युक्त विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिये ।
आचार्य पंडित जी ने भागवत कथा के सातवें दिन श्रीकृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया हैं ,वहीं मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मां देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का व्याख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा ब्यास पीठाधीश्वर श्री मिश्रा जी ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जी से सीखिए ।


श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य का अंतिम दिन होने के कारण जनादेश 24न्यूज के संपादक रामखिलावन यादव एवं दीनदयाल यादव ,गिरधारी यादव ,नारायण यादव ,और आदि भक्तों ने कथा स्थल पर पहुंचे, यादव परिवार ने उनका आत्मीय स्वागत किया। सभी लोगों ने कथा का रसपान किया। श्रद्धालु भक्त भी भाव-विभोर होकर सुदामा चरित्र की कथा श्रवण कर रहे थे ।
जब-जब भक्तों पर विपदा आती हैं प्रभु उनका तारण करने अवश्य आते हैं – महराज जी ।
भागवताचार्य उत्तम मिश्रा जी महराज ने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह करने पर अपने मित्र सखा श्रीकृष्ण जी से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे । उन्होंने कहा कि सुदामा जी ने द्वारकाधीश के महल का पता पुछा और महल की ओर आगे बढ़ने लगे तभी द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा नाम पता पुछा
उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं इस पर द्वारपाल महल के अंदर गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया हैं अपना नाम सुदामा बता रहा हैं जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा-सुदामा करते हुए तेज़ी से द्वार की ओर भागे । सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उन्हें सीने से लगा लिया सुदामा ने भी कन्हैया-कन्हैया कहकर उन्हें अपने गले से लगाया । दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गये वहीं श्री कृष्ण जी ने सुदामा को अपने ही राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया । जब-जब भी उनके भक्तों पर विपदा आई हैं प्रभु उनका तारण करने अवश्य आएं


सप्त-दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुई, बहेराडीह के दुर्गा चौक के भागवत परिसर खचा-खच भरा हुआ था ।
बहेराडीह के नंदलाल यादव के घर में चल रहे धार्मिक आस्था रखने वाली स्वर्गीय जुड़ीमती यादव के प्रथम पुण्य स्मृति यानी कि वार्षिक श्राद्ध मे नंदलाल यादव मुख्य यजमान और लक्ष्मीन यादव कथा ब्यास पीठाधीश्वर परम श्रद्धेय पं उत्तम मिश्रा जी महाराज सिरली वाले ने कहा कि इस सप्त-दिवसीय कथा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुईं ।
श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के दौरान व्यासपीठ पर ही भाव-विह्वल हो उठे और अपनी आंसू पोंछते रहे ।
सप्त-दिवसीय अनुष्ठान भागवत कथा का सिलसिलेवार भागवत महात्म्य वराह अवतार, ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र, कपिलोख्यान,जड़ भरत कथा, श्रीराम चरित्र, कृष्ण चरित्र,, बाल लीला, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी मंगल विवाह, सुदामा चरित्र, दत्तात्रेय के बाद परीक्षित मोक्ष की कथा प्रसंगों का संक्षिप्त वर्णन करने के दौरान किया
जो भी श्रद्धालु भागवत कथा का श्रवण करता है उसका जीवन तर जाता हैं – भागवताचार्य महाराज जी।
महाराज जी ने कहा जो भी भागवत कथा का श्रवण करता हैं उसका जीवन तर जाता हैं ।
सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा भक्ति, मित्रता व विनम्रता का अद्भुत उदाहरण,, पं उत्तम मिश्रा।
बहेराडीह में श्रीमद भागवत ज्ञान कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन।
सच्ची मित्रता कभी पद,धन या स्थिति नहीं देखती। वह ह्रदय से होती है। भक्ति और प्रेम भगवान को भाव चाहिए, भोग नहीं। प्रेम से दिया गया छोटा उपहार भी उन्हें अमूल्य लगता है। विनम्रता सुदामा ने कभी अपमान नहीं किया और न ही मांगने की इक्छा रखी। यह सच्चे संतोष का उदाहरण है। सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा भक्ति, मित्रता व विनम्रता का अद्भुत उदाहरण है।
उक्त बातें ग्राम बहेराडीह स्थित माँ दुर्गा चौंक में यादव परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान कथा के अंतिम दिवस सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुये ब्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि संतोष और विश्वास सुदामा ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी। सुदामा ने विश्वास रखा कि भगवान जो करेंगे अच्छा ही करेंगे। कर्म और श्रद्धा जीवन में भक्ति, प्रेम और सच्चाई रखो। बिना मांगे भगवान फल देते हैं। कथा वाचक ने कहा कि जो भगवान से सच्चा विश्वास रखता है और प्रेम से उनका स्मरण करता है। उसे भगवान स्वयं हर कठिनाई से उबार लेते हैं। कथा वाचक पं मिश्रा ने सुदामा और श्रीकृष्ण की कथा में गुरुकुल का समय, सुदामा का गरीब जीवन, सुदामा का उपहार, द्वारिका में सुदामा का स्वागत, सुदामा का लाया गया उपहार, सुदामा की वापसी और मनुष्य जीवन के लिये प्रेरणा का भाव पूर्वक वर्णन किया।
कथा सुनने वालों में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव गिरधारी यादव, बलौदा जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष नम्रता राघवेंद्र नामदेव, गुनेश्वर यादव सिवनी, छोटेलाल यादव, लालू कश्यप कमरीद, गोकुल यादव मड़वा,बाबूलाल यादव, कमलेश यादव खैरा, लीला राम यादव,गजाधर कौशिक पूर्व सरपंच कोसमंदा, गुलशन यादव, श्याम लाल यादव, संतोषी यादव बसंतपुर,टेम साय यादव, विशाल नाथ मन्नेवार नवापारा, महेश यादव चम्पा एवं अंचल के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुये।