कमरीद गांव में विराजी मां दुर्गा और लगातार 32 वा वर्ष जल रही ज्योति कलश और पूर्ण हो रहे भक्तों के मनोकामना



कमरीद गांव में विराजी मां दुर्गा और लगातार 32 वा वर्ष जल रही ज्योति कलश और पूर्ण हो रहे भक्तों के मनोकामना
जांजगीर चांपा जिले के बलौदा ब्लाक के ग्राम पंचायत कमरीद जो आयुर्वेद ग्राम का दर्जा प्राप्त है वहां मां दुर्गा का ज्योति कलश लगातार 32वर्षों से लगातार ज्योति प्रज्वलित भक्तों के द्वारा किया जा रहा है
इस बार 70भक्तों ने अपने मनोकामना के लिए ज्योति प्रज्वलित किए है गांव भक्तों के अलावा आसपास के गांव शहर के लोग भी ज्योति प्रज्वलित किए है कमरीद अफरीद ,कोसमंदा ,जांजगीर ,कोरबा ,बिलासपुर रायपुर और ऐसे कई जगहों के भक्तों ने अपने भक्ति की आस में माता के चरणो में माथा टेककर अपनी आस्था माता के चरणो में अपनी विश्वास की ज्योति प्रज्वलित की हुई है
इस नवरात्रि पर्व में माता चौरा में विराजित म दुर्गा की का आचार्य है श्री शिव शंकर वैष्णव जो लगातार 32वर्षों से इस जगह में आचार्य बनकर मां की सेवा प्रदान कर रहे है
नवरात्रि के चौथे दिन शक्ति के चतुर्थ स्वरूप माँ कुष्मांडा की आराधना पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ की जा रही है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, देवी कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है।
घंटो की गूंज और भक्ति की लहरें, नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्र घंटा
नवरात्रि के दूसरे दिन तप की देवी मां ब्रम्हाचारणी की पूजा
अष्टभुजा स्वरूप वाली यह देवी सिंह पर सवार हैं और इनके हाथों में कमंडल, चक्र, गदा, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश और जपमाला होती है। मान्यता है कि माँ कुष्मांडा सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं और वहीं से संपूर्ण ब्रह्मांड को ऊर्जा प्रदान करती हैं।
माँ कुष्मांडा की कथा
बहुत प्राचीन समय की बात है, जब संपूर्ण सृष्टि अंधकारमय थी। ना कहीं कोई प्रकाश था, ना ही जीवन। चारों ओर शून्यता ही शून्यता फैली थी। तब एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई — वही थीं माँ कुष्मांडा। माँ ने जब मंद मुस्कान (हल्की हँसी) की, तभी चारों ओर प्रकाश फैल गया और ब्रह्मांड की रचना हुई। इसीलिए इन्हें “कु-उष्मा-अंड” कहकर बुलाया गया:
“कु” = थोड़ा
“उष्मा” = ऊर्जा
“अंड” = ब्रह्मांड
यानि जिनके थोड़ा सा हँसने से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई — वही हैं माँ कुष्मांडा।
माँ का स्वरूप
माँ कुष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं यानी उनके आठ भुजाएँ हैं।
उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला होती है।
माँ का वाहन सिंह है, जो उनके शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता
माँ कुष्मांडा सृष्टि की आदि शक्ति हैं। वे ही सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं और वहीं से संपूर्ण ब्रह्मांड को ऊर्जा देती हैं।देवताओं ने जब उनसे सृष्टि की रक्षा के लिए प्रार्थना की, तब माँ ने अपनी शक्ति से त्रिदेवों को उत्पन्न किया — ब्रह्मा, विष्णु और महेश। फिर ब्रह्मा जी ने सृष्टि का विस्तार किया।
माँ कुष्मांडा की पूजा का फल
श्रद्धापूर्वक पूजन करने से स्वास्थ्य, दीर्घायु, और समृद्धि प्राप्त होती है। मानसिक तनाव और भय दूर होते हैं। साधक को दिव्य तेज, ओज और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।
पूजा मंत्र
ॐ देवी कुष्माण्डायै नमः।
या देवी सर्वभूतेषु माँ कुष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥