जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, हमेशा मुस्कुराते रहना सीखें : अनिरुद्धाचार्य महाराज

सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष कथा के साथ हुआ समापन
जांजगीर चांपा। बम्हनीडीह में जयपुरिया परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का समापन शनिवार,19 सितंबर को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष कथा के साथ हुआ।
श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन भगवताचार्य अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, मुस्कुराते रहना सीखें। भगवान कृष्ण का जीवन भी जन्म से लेकर अंत एक संघर्षों से भरा रहा। जन्म लेते ही माता-पिता – बिछोह, पालने वालों से वियोग, फिर भी उन्होंने कभी मुस्कुराना नहीं छोड़ा। हम जब भी मुस्कुराते हुए भगवान की मूर्ति लाते तो संदेश यही है कि हमें भी मुस्कुराते हुए जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में मनुष्य को मुस्कुराने और विचार करने का हुनर मिला है, इसे चिंता में व्यर्थ न करें। काम संसार का करो और ध्यान जगन्नाथ की ओर रखो। महाराज जी ने सुदामा चरित्र में बताया कि सुदामा के पास खाने को रोटी तक नहीं थी, लेकिन मन में कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम था। कृष्ण ने तंदुल के दो मुट्ठी चावल में उनका सारा के सारा प्रेम स्वीकार कर लिया, जिसके पास सब कुछ है पर मन में भगवान के लिए जगह नहीं, वही असली गरीब है। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति को नशे से बचाने और अच्छे आचरण से ‘छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा’ को चरितार्थ करने का आह्वान किया। इस दौरान जयपुरिया परिवार द्वारा कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज जी को प्रतिक चिन्ह देकर सम्मान किया गया। कथा के अंतिम दिन कथा श्रवण करने मंत्री खुशवंत साहेब, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महराज,पूर्व सांसद श्रीमती कमला पाटले, जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता मिरी,उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया सभापति राजकुमार साहू, आशा साव राठौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।