श्रीमद्भागवत कथा: कंस वध, मथुरा गमन और रुक्मिणी विवाह पर पंडित धीरेन्द्र तिवारी जी का अद्भुत प्रवचन


श्रीमद्भागवत कथा: कंस वध, मथुरा गमन और रुक्मिणी विवाह पर पंडित धीरेन्द्र तिवारी जी का अद्भुत प्रवचन

जांजगीर चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कमरीद में धर्म निष्ठा भागवत प्रेमी सज्जनों अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक परमपिता परमेश्वर एवं के आशीर्वाद से कमरीद में स्वर्गीय तोमेश कुमार कौशिक के वार्षिक श्राद्ध निमित्त संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है श्री मद भागवत का माहात्म्य अतुलनीय एवं अवर्णनीय है जो कि कमरीद गांव के
सत्यप्रकाश कौशिक एवं उनके धर्म पत्नी श्रीमति रूपी बाई कौशिक के घर मिडिल स्कूल के समीप सागर पारा मोहल्ला में रामधन कौशिक नवभारत पत्रकार के छोटे भाई के निज निवास पर सर्व पितृ मोक्षार्थ आयोजित श्रीमद्भागवत कथा पुराण के छठवें दिवस पर विद्वान कथा वाचक पं. धीरेन्द्र तिवारी जी ( पंडित धीरेन्द्र तिवारी जी ) ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों से श्रोताओं को आत्म विभोर कर दिया।




आज की कथा में कंस वध, मथुरा गमन और रुक्मिणी विवाह जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों पर चर्चा की गई। शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए धर्म, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का महत्व समझाया।
कंस वध की कथा सुनाते हुए तिवारी जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से कंस के अन्याय और अधर्म का अंत किया। कंस वध केवल एक अत्याचारी राजा का विनाश नहीं था, बल्कि सत्य, धर्म और न्याय की स्थापना का प्रतीक था। यह घटना भगवान की अद्भुत शक्ति और अधर्म के विनाश तथा धर्म की पुनर्स्थापना के लिए उनकी अटल प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इसके बाद, श्रीकृष्ण के मथुरा गमन का वर्णन करते हुए तिवारी जी ने बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने बचपन के सखा, गोपियों और ब्रजवासियों को छोड़कर कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया। यह प्रसंग भक्ति, त्याग और धर्म के लिए अपने निजी सुखों का त्याग करने की प्रेरणा देता है।
रुक्मिणी विवाह के प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के बीच पवित्र प्रेम और समर्पण का वर्णन किया गया। तिवारी जी ने बताया कि रुक्मिणी ने अपने प्रेम और भक्ति के बल पर भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने का संकल्प लिया। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान ने स्वयं रुक्मी के विरोध के बावजूद देवी रुक्मिणी को अपनाया। यह प्रसंग सच्चे प्रेम, विश्वास और भक्ति की विजय का प्रतीक है।
रुक्मिणी-कृष्णजी के मंगल परिणय के अवसर पर कृष्ण जी रुक्मणी जी के दिव्य स्वरूप में उपस्थित हुए लोगो ने जिसे देखकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए।इस अवसर पर डॉक्टर रामखिलवान यादव संपादक जनादेश 24न्यूज, रमेश कुमार यादव ,शांति कश्यप,रामसुख कश्यप ,
उत्तम कश्यप, रामकृष्ण वैष्णव ( पुजेरी गुरुजी ) ,के भक्ति से भरे विवाह गीत एवं भजन-कीर्तन को सुनकर कोई अपने को रोक नहीं पाये।सभी भक्तगण, आयोजक परिवार और उपस्थित श्रद्धालु उत्साहपूर्वक नृत्य करते हुए नजर आएआज के पवित्र कथा आयोजन में अनेक विशिष्ट जन उपस्थित रहे,इस अवसर पर स्कूल पारा,माता चौरा ,भालू डेरा ,बरछा पारा क्षेत्र की महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कथा के समापन पर आरती और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया।