कोसा,कांसा एवं कंचन की पावन भूमि चांपा नगर के परशुराम मार्ग स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में 21 दिनों तक वेद वेदांत की ज्ञान गंगा बहेगी जगद्गुरु कृपालु जी महाराज


धर्म-कर्म ! चांपा नगर में वेद वेदांत की ज्ञान गंगा प्रवाहित होगी।
कोसा,कांसा एवं कंचन की पावन भूमि चांपा नगर के परशुराम मार्ग स्थित दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में 21 दिनों तक वेद वेदांत की ज्ञान गंगा बहेगी । जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के प्रमुख प्रचारक डां स्वामी युगल शरण जी महाराज द्वारा वेद वेदान्त पर आधारित दिव्य ज्ञान का प्रवचन दिया जायेगा । यह आयोजन दिनांक 30 नवंबर से दिनांक 20 दिसंबर 2025 तक चलेगा । प्रवचन का समय सायंकाल 6:00 से रात्रि 8:00 बजें तक निर्धारित हैं ।
प्रवचन के माध्यम से पूरे भारतवर्ष में प्रचार-प्रसार
स्वामी जी के द्वारा भारतवर्ष सहित संपूर्ण विश्व में अपने प्रवचन के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा हैं । पहले कृपालु जी महाराज स्वयं करते थे अब यह दायित्व उनके शिष्यों द्वारा उठाया गया हैं । इसी कड़ी में वृंदावन प्रेम मंदिर प्रेम से आ रहे जगतगुरु स्वामी श्री कृपालु जी महाराज के प्रमुख प्रचारक डॉ. स्वामी युगल शरण जी द्वारा अद्वितीय आत्म सिद्धांत पर प्रवचन किया जाएगा । वृंदावन से अक्षिता दीदी
दीदी, गुनगुन दीदी,शिखा दीदी वेस्ट बंगाल, गिरधर भाई,राज भाई, आशुतोष भाई एवं अन्य सन्यासी भाइयों की टीम पिछले 15 दिनों से नगर में आई हुई हैं ।
आयोजन का प्रचार-प्रसार
आयोजन का प्रचार-प्रसार नगर सहित पूरे जांजगीर-चांपा जिले में किया जा रहा हैं । धार्मिक आस्था रखने वाले शशिभूषण सोनी ने बताया कि परशुराम चौक हनुमान मंदिर प्रांगण का चयन आध्यात्मिक व दार्शनिक प्रवचन के लिए स्थान चयन किया गया हैं । नगर पालिका द्वारा तेजी से कथा स्थल पर टाईल्स लगाये जा रहे हैं वही आयोजन समिति द्वारा टेंट , लाइट ,बैनर और नगर के प्रमुख स्थानों पर प्लैक्स लगाए गए हैं । बेहतरीन साउंड सिस्टम सहित आवश्यक साधन की व्यवस्था की जा रही हैं ।
भूवैज्ञानिक हैं स्वामी डॉ. युगल शरण जी महाराज
जगतगुरु स्वामी कृपालु जी महाराज के प्रमुख प्रचारक डॉ. स्वामी युगल शरण जी महाराज एक भू-वैज्ञानिक हैं । इन्होंने भू-विज्ञान पर एक उच्चतम डिग्री प्राप्त की हैं । वह 10 वर्षों तक भारत सरकार के अधीन एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं ।
17 अक्टूबर, 2000 से संन्यासी जीवन जी रहे हैं
बचपन से साधु-संतों के सानिध्य में रहे स्वामी युगल शरण जी जब जगतगुरु कृपालु जी महाराज की संपर्क में आए तब उनका हृदय परिवर्तन हुआ । सारी सुविधाएं सम्मान को छोड़ वह कृपालु जी महाराज के सानिध्य में आ गए । कृपालु जी महाराज के मार्गदर्शन में वेद वेदांत , उपनिषद व धर्म शास्त्रों का गहन अध्ययन किया । दिनांक 17 अक्टूबर, 2000 को कृपालु जी महाराज द्वारा स्वामी युगल शरण को सन्यास का वस्त्र प्रदान किया गया । तब से स्वामी युगल शरण अद्वितीय समन्वयात्मक सिद्धांत पर आधारित वेद वेदांत, उपनिषद ज्ञान का प्रचार कर रहे हैं ।