स्वर्गीय जुड़ीमती यादव के सुपुत्र नंदलाल यादव के निवास स्थल बहेराडीह पर चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा



भागवत कथा महात्म्य के सप्तम दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मणी मंगल विवाह धूमधाम से मनाई गई इस दौरान सुंदर सजी हुई झांकी ने सबका मन मोहा । विवाह संस्कार और मंगल गीतों के साथ बारात निकाली गई , जिसमें नंदलाल यादव परिवार के साथ-साथ श्रद्धालु-भक्त बाराती और घराती बनें । इस दौरान भक्ति रुपी गंगा में गोता लगाकर श्रोताओं ने श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के विभिन्न अलौकिक रहस्यों को जाना । स्वर्गीय श्रीमति जुड़ीमती यादव के वार्षिक श्राद्ध निमित्त श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिन कृष्ण सखा उद्धव प्रसंग के बाद में मां रुक्मणी-श्रीकृष्ण मंगल विवाह की सुंदर झांकियां सजाई गई । अंचल के सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंड़ित उत्तम मिश्रा जी महराज के द्वारा भक्ति रुपी गंगा में श्रोतागण गोता लगाकर पुण्य स्नान कर रहे हैं और प्रस्तुत भजन-कीर्तन में अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं ।


इस दौरान आचार्य पंडित उत्तम मिश्रा जी ने जैसे ही “बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन हैं गयो लटा-लटा ” बहुत ही सुंदर भक्तिपूर्वक गाना गाकर प्रस्तुत किया श्रद्धालु-भक्त झूम उठे । कथा स्थल बहेराडीह के मां दुर्गा चौक पूरी तरह से द्वारिका पुरी धाम में परिवर्तित हो गया बन गया । स्थल पर रुक्मणी देवी और भगवान श्रीकृष्ण चंद्र जी के वेशभूषा में श्री कृष्ण के रूप में नेहा मिश्रा जी भागवताचार्य श्री उत्तम मिश्रा जी के सुपुत्री एवं रूखमणि रूप में सीमा यादव जी सुंदर छवि में दिखाई दे रही हैं। इस दौरान कथा स्थल पर भगवान और भक्त का आत्मा से परमात्मा का तारतम्य जुड़ गया
भागवताचार्य पंड़ित उत्तम मिश्रा जी ने कहा कि रुक्मिणी भगवान की माया के समान थी, रुक्मणी ने मन ही मन यह निश्चित कर लिया था कि भगवान श्रीकृष्ण ही मेरे लिए योग्य पति हैं लेकिन रुक्मिणी का भाई रूक्मी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था इससे उसने उस विवाह को रोक कर , शिशुपाल को रुक्मिणी का पति बनाने का निश्चय किया , इससे रुक्मिणी को बहुत दुःख हुआ। कथा यात्रा का विस्तार करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अपने एक विश्वासपात्र को भगवान श्रीकृष्ण के पास भेजा साथ ही अपने आने का प्रयोजन बताया। इसके बाद श्रीकृष्ण जी विदर्भ जा पहुंचें । उधर रुक्मिणी का शिशुपाल के साथ विवाह की तैयारियां हो रही थी । परंतु उनकी प्रार्थना का असर हुआ और श्रीकृष्ण का विवाह रुक्मिणी के साथ हुआ ।इस अवसर पर कथा सुनने आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी की झांकी के दर्शन किए । कथा में सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही हैं ।